पैसा मिल्खा सिंह की प्राथमिकता नहीं थी. वे चाहते थे कि मेहरा यह फिल्म बनाएं. (File Photo)
1958 में स्वतंत्र भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में अपना पहला स्वर्ण पदक मिल्खा सिंह (Milkha Singh) की वजह से जीता और उन्होंने एशियाई खेलों में दो स्वर्ण पदक जीते. पैसा मिल्खा सिंह की प्राथमिकता नहीं थी. वे केवल यह चाहते थे कि राकेश ओमप्रकाश मेहरा यह फिल्म बनाएं.
मुंबई. दिवंगत मिल्खा सिंह (Milkha Singh) ने डायरेक्टर राकेश ओमप्रकाश मेहरा (Rakeysh Omprakash Mehra) से उनकी लाइफ पर फिल्म बनाने के लिए सिर्फ एक रुपया लिया था. ‘भाग मिल्खा भाग’ (Bhaag Milkha Bhaag) नाम की इस बायोपिक में फरहान अख्तर ने लीड रोल प्ले किया था. एक रुपये के नोट की खास बात यह थी कि यह 1958 में छपा था, जब इन एथलीट ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वतंत्र भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीता था.
राकेश ओमप्रकाश मेहरा पिक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ राजीव टंडन ने एक बयान में कहा था- ‘हम अपनी फिल्म के माध्यम से मिल्खा जी की कहानी बताने के लिए उनकी सराहना के लिए प्राइसलेस टोकन देना चाहते थे. हमने बहुत लंबे समय तक कुछ खास खोजा. फिर फाइनली हमने विशेष रूप से एक रुपये के नोट की सोर्सिंग की, जो 1958 में छपा था.’
नोट की प्रासंगिकता यह थी कि ‘1958 में स्वतंत्र भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में अपना पहला स्वर्ण पदक मिल्खाजी की वजह से जीता और उन्होंने एशियाई खेलों में दो स्वर्ण पदक जीते.’ पैसा मिल्खा सिंह की प्राथमिकता नहीं थी – वे चाहते थे कि मेहरा यह फिल्म बनाएं.
महान एथलीट चाहते थे कि उनकी बायोपिक इस तरह से बनाई जाए कि यह अधिक से अधिक युवाओं को एथलेटिक्स में पदक अर्जित करने के लिए प्रेरित करे. सिंह ने प्रोजेक्ट में क्लाज यह भी रखा था, जिसमें कहा गया था कि लाभ का एक हिस्सा मिल्खा सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट को दिया जाएगा, जिसकी स्थापना 2003 में गरीब और जरूरतमंद खिलाड़ियों की मदद करने के उद्देश्य से की गई थी. भाग मिल्खा भाग 2013 की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म में से एक थी और इसे आलोचकों और दर्शकों दोनों से समान रूप से प्रशंसा मिली.